एक फ्रांसीसी परिवार फंसा है यहाँ, करता है हनुमान जी की पूजा महराजगंज

OmTimes. in - 28-4-2020 - 6 महराजगंज (ऊँ टाइम्स)  यूपी के महराजगंज जिले पुरंदरपुर थाना के लक्ष्मीपुर क्षेत्र के निकट ग्राम पंचायत कोल्हुआ उर्फ सिहोंरवा के एक मंदिर में एक फ्रांसीसी परिवार 21 मार्च से रह रहा है। जो टूरिस्ट वीजा पर बीते एक मार्च 2020 को पाकिस्तान से बाघा बॉर्डर होते हुए भारत में आया था। इस समय ये लोग चर्चा का विषय बने हुए हैं।.
आप को बता दें कि मोटर मैकेनिक पैट्रिस पल्लेरेज अपनी पत्नी वर्जिनिया, बेटियां ओफेली और लोला और बेटा टॉम के साथ भारत यात्रा पर आए हुए थे। इस बीच कोरोना वायरस के कारण पूरे देश में लॉकडाउन हो गया और नेपाल सीमा को सील कर दिया गया।.
ऐसे में ये लोग गांव के ही शिव मंदिर में अपना दिन बीता रहे हैं। मंदिर के पुजारी उदयराज ने बताया कि फ्रांसीसी परिवार शिव रामजानकी मंदिर के पास स्थित कैंप में रहता है। वे नियमित मंदिर में आकर पूजा पाठ करते हैं।.
उन्होंने बताया कि वे प्रतिदिन सुबह और शाम मंदिर आते हैं और पूरा परिवार हाथ जोड़कर ‘राम-राम, सीता-राम’ का नाम जपते रहते हैं। वे भगवान से कोरोनो वायरस को मिटाने की प्रार्थना करते हैं। वहीं गांव के लोगों को भी वे राम-राम या नमस्ते करके अभिनंदन करते हैं।
पुजारी ने बताया कि शुरुआत में ये लोग गांववालों से घुलमिल नहीं पा रहे थे लेकिन अब उन्हें भारतीय संस्कृति खूब पसंद आ रही है। फ्रांसीसी परिवार का कहना है कि वे यहां से वापस जाने के बाद भी शिव, पार्वती, गणेश और हनुमान जी की पूजा करते रहेंगे।.
पल्लेरेज ने कहा कि ऐसे कभी गांव में रहने का मौका नहीं मिला था लेकिन लॉकडाउन की वजह से हमें गांव को जानने का एक मौका मिला है। गांव के लोगों ने भी अब हमें अपने परिवार का सदस्य मान लिया है।.
वे बताते हैं कि कोरोना वायरस के कारण वे सोशल डिस्टेंस का पालन करते हैं और बिना मास्क के घर से बाहर नहीं निकलते हैं।
रविवार को उच्चाधिकारियों के आदेश पर पुलिस क्षेत्राधिकारी फरेंदा अशोक कुमार मिश्र मौके पर पहुंचे। सबसे पहले उन्होंने वहां से अनावश्यक रूप से खड़े लोगों को हटवाया। फिर फ्रांसीसी परिवार का हाल जाना। इस दौरान उन्होंने परिवार को रोजमर्रा से जुड़ी वस्तुओं तथा राशन व फल आदि मुहैया कराया।

लेखक: OM TIMES News Paper India

(Regd. & App. by- Govt. of India ) प्रधान सम्पादक रामदेव द्विवेदी 📲 9453706435 🇮🇳 ऊँ टाइम्स , सम्पादक अविनाश द्विवेदी

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