हरियाणा और महाराष्ट्र में फिर लहराया भाजपा का झंडा , BJP को हरियाणा में मिला छह निर्दलियों का मिला साथ

OM TIMES  e-news paper India
Publish Date – 25/10/2019. https://omtimes.in  2019..2रामदेव द्विवेदी , नई दिल्ली (ऊँ टाइम्स)  सन् 2019 के लोकसभा चुनाव में जबर्दस्त जीत के बाद अब हरियाणा और महाराष्ट्र में जनता ने फिर भाजपा के नेतृत्व वाली स्टेट सरकार पर मुहर लगा दिया है। विगत दिवस आए विधानसभा चुनाव के परिणाम भाजपा के लिए अनुमानों से कम रहा! लेकिन फिर भी भाजपा ही दोनों राज्यों में सरकार बनाने जा रही है। हरियाणा में 90 में से 40 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी भाजपा को छह अन्य निर्दलीयों का समर्थन भी मिल गया है।

महाराष्ट्र में एनडीए को मिला बहुमत –  महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना गठबंधन को 288 में से 161 सीटों पर जीत के साथ जबरदस्त बहुमत मिला है। भाजपा नेतृत्व ने भी दोनों राज्यों में अपने मुख्यमंत्रियों पर भरोसा जताया है। इस जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर और महाराष्ट्र में देवेंद्र फड़नवीस को फिर से मुख्यमंत्री का कमान सौंपने की पुष्टि किया है। मनोहर लाल आज राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।

हरियाणा में आश्चर्यचकित करने वाले रहे नतीजे –   हरियाणा में चुनाव परिणाम काफी चौंकाने वाला रहा है । यहाँ सबसे ज्यादा आश्चर्य वाली बात यह है कि सालभर पहले अस्तित्व में आई जननायक जनता पार्टी (जजपा) को दस सीट का मिलना । साल भर पहले ही पारिवारिक विवाद के बाद इनेलो से अलग होकर दुष्यंत चौटाला ने पार्टी का गठन किया था। जजपा ने पहली ही बार में 10 सीटों पर जीत हासिल कर ली। नतीजों के बाद जजपा को किंगमेकर की भूमिका में देखा जा रहा था। हालांकि भाजपा को सात में से छह निर्दलीयों का समर्थन मिलने के बाद जजपा का चमत्कारिक प्रदर्शन भी उसे कुछ खास फायदा दिलाता नहीं दिख रहा है।

कांग्रेस को मिली हरियाणा में संजीवनी –  हरियाणा के नतीजे कांग्रेस के लिए भी अच्छे रहे। कांग्रेस 15 से 31 सीट पर पहुंच गई। चुनाव के ठीक पहले पार्टी में उभरी कलह और उठापटक के बावजूद ये नतीजे कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने वाले हैं। सीटों के लिहाज से नतीजे भाजपा के लिए थोड़ा निराशाजनक रहे। पिछले साल 47 सीटें जीतने वाली भाजपा 40 सीटों पर आ गई। हरियाणा के नतीजों में भाजपा के लिए सोचने वाली बात यह है कि सात निर्दलीयों में से छह भाजपा से जुड़े रहे हैं। भाजपा के लिए बड़ा झटका यह भी है कि राज्य सरकार में कैबिनेट का हिस्सा रहे आठ मंत्री चुनाव हार गए हैं।

महाराष्ट्र पर दिख रहा आर्थिक सुस्ती का साया –  महाराष्ट्र के नतीजे बहुत ज्यादा उलटफेर वाले तो नहीं कहे जा सकते हैं, लेकिन उम्मीदों से दूर जरूर हैं। विश्लेषकों का मानना है कि देश में फैला आर्थिक सुस्ती का साया महाराष्ट्र में भाजपा के नतीजों पर दिखा है। 2014 में अकेले लड़कर 288 में 122 सीटें जीतने वाली भाजपा के खाते में इस बार नतीजों और रुझानों के आधार पर 105 सीटें आती दिख रही हैं। शिवसेना भी 63 से 56 पर आ गई है।

राकांपा का आंकड़ा इस बार 41 से 54 पर पहुंच गया है। सोनिया गांधी के हाथ में दोबारा कमान आने के बाद कांग्रेस भी बढ़त में दिखी। पार्टी को 2014 के 42 के मुकाबले 44 सीट मिली है। नतीजों से सरकार गठन के गणित पर ज्यादा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। हालांकि उपमुख्यमंत्री शिवसेना को मिलेगा या नहीं, इस मुद्दे पर न तो देवेंद्र फड़नवीस ने मुंह खोला है, न ही उद्धव ठाकरे ने। फिलहाल उद्धव ठाकरे यह कहकर ताना मारने से नहीं चूके कि जिनके नेत्र बंद थे, उन्हें खोलकर जनता ने अंजन लगा दिया है। उम्मीद है कि अब पीछे की गई गलतियां दोहराई नहीं जाएंगी।

चुनाव परिणाम का खास मायने –

– पुरजोर ताकत झोंकने के बाद भी दोनों राज्यों में उम्मीद से कमतर नतीजे भाजपा को सोचने पर मजबूर करेंगे

– नतीजे यह भी दिखाते हैं कि विधानसभा चुनाव में केवल राष्ट्रीय नहीं स्थानीय मुद्दों को भी तवज्जो देना जरूरी

– लोकसभा चुनाव में शिकस्त के बाद कांग्रेस के लिए नतीजे कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने वाले साबित होंगे

हरियाणा में भाजपा पर ये फैक्‍टर पड़े भारी

– सीट बंटवारे में जाट समुदाय की अनदेखी भाजपा पर भारी पड़ी

– भाजपा कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर संवाद बनाने में विफल रहे

– बागियों को नहीं साध पाना भी सत्ताधारी दल की विफलता रही

– हुड्डा के हाथ में कमान देना कांग्रेस के लिए फायदेमंद रहा

महाराष्ट्र में इन वजहों से भाजपा को नुकसान

– विदर्भ क्षेत्र में कोशिशों के बाद भी किसानों की आत्महत्याएं नहीं रुकीं

– शरद पवार के परिवार पर ईडी का प्रहार मराठा समाज को हजम नहीं हुआ

– भाजपा-शिवसेना गठबंधन के कारण पिछली बार के कई दावेदार बागी हो गए

– मंदी और बेरोजगारी का जमीन पर दिखता असर भी भाजपा के लिए संकट बना

अब देखिए आगे क्या होगा..?

भाजपा को सात में से छह निर्दलीयों का समर्थन मिलना तय माना जा रहा है। इससे बहुमत के लिए जरूरी 46 विधायकों का आंकड़ा पूरा हो जाएगा। पार्टी को जजपा का भी साथ मिल सकता है। कांग्रेस के लिए राह मुश्किल है। उसे न केवल जजपा बल्कि पांच निर्दलीयों का साथ जरूरी होगा। भाजपा-शिवसेना गठबंधन की सरकार आसानी से बन जाएगी। हालांकि सरकार गठन की शर्तो पर थोड़ा-बहुत पेच फंस सकता है।

लेखक: OM TIMES News Paper India

(Regd. & App. by- Govt. of India ) प्रधान सम्पादक रामदेव द्विवेदी 📲 9453706435 🇮🇳 ऊँ टाइम्स , सम्पादक अविनाश द्विवेदी

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