मुस्लिम देशों से मदद और समर्थन माँगने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान सऊदी अरब और ईरान के लिए आज हुए रवाना

OM TIMES e-news paper India
Publish Date – 13/10/2019 https://omtimes.in 2019...7नई दिल्ली ( रामदेव द्विवेदी, ऊँ टाइम्स)  आज पाकिस्तान के प्रधानमंत्री एक बार फिर कश्मीर मसले पर मुस्लिम देशों से समर्थन मांगने के लिए यात्रा पर चले गए हैं। वो कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा चुके हैं और वहां से मदद के लिए गुहार भी लगा चुके हैं मगर किसी देश ने उनके साथ इस मामले पर खुलकर उनका कोई समर्थन नहीं किया। उनको उम्मीद थी कि अमेरिका इस मामले में हस्तक्षेप करेगा और भारत से कश्मीर पर अनुच्छेद 370 को बहाल करने के लिए कहेगा लेकिन वहां से भी उनके नापाक मंसूबों को कामयाबी नहीं मिली ! और तो और मौजूदा समय में भी कश्मीर के मामले पर कोई बड़ा मुस्लिम देश भी उनके साथ खड़ा नजर नहीं आ रहा है। सिर्फ मलेशिया और तुर्की ने साथ देने के लिए थोड़ी सी रजामंदी दी थी, उनकी इस रजामंदी के पीछे उनके अपने फायदे निहित थे।

इमरान खान ईरान और सऊदी अरब की कर रहे हैं यात्रा

आज इमरान खान ईरान और सऊदी अरब की यात्रा के लिए निकल गए हैं। वो पहले ईरान गए हैं ,उसके बाद सऊदी अरब जाएंगे। उनकी इन दोनों देशों की यात्रा का एजेंडा क्या है? इसका राज विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने खोल दिया। उन्होंने दोनों देशों की यात्रा पर जाने का पूरा एजेंडा बताया। कहा कि ईरान और सऊदी अरब दो मुस्लिम देश हैं, इस वजह से उनसे इस मामले में दखल देने के लिए कहा जा रहा है जिससे कश्मीर के मुद्दे को सुलझाया जा सके।

कई बार परमाणु हमले का दिया धमकी फिर भी कुछ नहीं हुआ हासिल

अभी तक पाकिस्तान की ओर से कश्मीर के मुद्दे को लेकर भारत से जंग की तैयारी की जा रही थी। परमाणु बम से हमला किए जाने तक की बात भी पाकिस्तान द्वारा कही गई। इमरान खान ने UNGA की बैठक में अंतरराष्ट्रीय मंच से परमाणु युद्ध करने तक का बात कहा था ! उन्होंने सोचा था कि यदि वो वहां पर इस तरह की बातें कह देंगे तो हो सकता है कि अंतरराष्ट्रीय मंच इस ओर गंभीरता से विचार करे और कश्मीर को लेकर कुछ हो मगर उनकी इस डींग हाँकने की गीदड़भभकी का भी कोई असर नहीं हुआ। वहाँ से भी निराशा हाथ लगने के बाद अब वो फिर से ईरान और सऊदी अरब जाकर इन दो मुस्लिम देशों को अपने साथ जोड़ना चाह रहे हैं।

इमरान खान मुस्लिम देशों को साथ लेकर चलने की कर रहे हैं तैयारी-

शाह महमूद कुरैशी से हमारे मीडिया द्वारा जब यह पूछा गया कि इमरान खान किस-किस एजेंडे को लेकर इन दोनों देशों की यात्रा पर गए हैं? तो शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि एजेंडा तय है, कश्मीर के मसले पर हम इन दोनों देशों को साथ लेकर चलना चाहते है, जब साथ देने वालों की संख्या बढे़गी तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर दबाव बढ़ेगा। उसके बाद इस मसले का बातचीत के जरिए हल निकाला जाएगा। कुरैशी अब युद्ध या परमाणु हमले की बात नहीं करते। उनका कहना था कि युद्ध किसी समस्या का हल नहीं है। यदि युद्ध होगा तो उससे काफी नुकसान होगा। ग्लोबल इकानमी पर भी असर पड़ेगा। जन-धन की हानि तो निश्चित है।
जब उनसे पूछा गया कि पाक नेता हसन इकबाल ही कह रहे हैं कि कश्मीर के मसले पर अब कुछ नहीं हो पाएगा? पाकिस्तान को कुछ हासिल नहीं होगा, भारत ने जो कर दिया वो उस पर कायम रहेगा?  सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि हसन इकबाल जब सत्ता में थे तो उन्होंने अपने 5 साल के कार्यकाल में एक बार भी इस मुद्दे पर कोई बात नहीं की, यहां तक कि कश्मीर का नाम तक नहीं लिया, ये मामला 72 साल पुराना है, उनकी सोच मासूम है। इसी सरकार ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया है। आज कश्मीर के बारे में अंतरराष्ट्रीय मीडिया को भी पता चल चुका है। इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ। कश्मीर को लेकर तमाम मंचों पर बहस भी हो रही है।

अपने मुंह मिया मिट्ठू बन रहे हैं शाह महमूद कुरैशी –
शाह महमूद कुरैशी अपने मुंह मियां मिट्ठू बनते रहे। जब उनसे ये पूछा गया कि कश्मीर के बदलाव को लेकर वो क्या कहेंगे? तो उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाया जाना ठीक नहीं रहा है। कश्मीर के लोग जमा हो रहे हैं वो खुद इस चीज को गलत बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक डिप्लोमैसी पॉलिसी के तहत काम किया जा रहा है। ये कोई हथौड़ा मारने वाला काम नहीं है।

इमरान के इस दौरे में मुख्य बात यह है कि सऊदी अरब और ईरान के आपसी रिश्ते हमेशा से ही बेहद तनावपूर्ण रहे हैं। सबसे बड़ी बात इनमें शिया और सुन्नी होने का है। दूसरा सऊदी अरब जहां अमेरिका का दोस्त है वहीं ईरान से अमेरिका 36 का आंकड़ा है। इसके अलावा पाकिस्तान से भी अमेरिका संबंध अब पहले की तरह बेहतर नहीं है। वहीं मुस्लिम देशों के संगठन OIC में भी कश्मीर मसले पर पाकिस्तान का साथ उस तरह से नहीं दिया जिसकी कोशिश पाकिस्तान की ओर से की गई थी। वहीं इस संगठन के कई देश खुले तौर पर भारत के साथ हैं और कश्मीर को उन्होंने पूरी तरह से आंतरिक मसला कहकर पाकिस्तान को अलग थलग कर दिया है। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि पाकिस्तान जिनसे आस लगाए बैठा है वो एक मंच पर कैसे आएंगे?
मालूम हो कि सऊदी प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान इमरान खान से पहले से ही खफा है, अब इमरान दुबारा से उनसे मिलकर नाराजगी दूर करना चाह रहे हैं। इमरान सऊदी प्रिंस के चार्टर्ड प्लेन से ही UNGA की मीटिंग में हिस्सा लेने के लिए गए थे, इसी मीटिंग के बाद प्रिंस ने इमरान से अपना ये चार्टर्ड प्लेन वापस मंगा लिया था। भारत के साथ सऊदी अरब के रिश्ते बेहतर है, वो अपने यहां के सर्वोच्च सम्मान से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सम्मानित कर चुके हैं। अब इमरान सऊदी प्रिंस को साथ लेकर भारत पर दबाव बनाना चाह रहे हैं।

लेखक: OM TIMES News Paper India

(Regd. & App. by- Govt. of India ) प्रधान सम्पादक रामदेव द्विवेदी 📲 9453706435 🇮🇳 ऊँ टाइम्स , सम्पादक अविनाश द्विवेदी

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